अगर अपना आकर्षण बढ़ाने के लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट लेने जा रहे हैं, तो पहले से कुछ जानकारी करना अच्छा होगा। ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें।
आज किसी भी शहर की गली-गली में स्पा और ब्यूटी पार्लर के बोर्ड देखे जा सकते हैं। ये सभी तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट का भी दावा करते हैं। त्वचा की कायाकल्प से लेकर लेजर विधि द्वारा अनचाहे बालों से छुटकारा दिलाने तक। सौंदर्य और आकर्षण में बढ़ोतरी करने वाले इन ट्रीटमेंट के फेर में लोग अच्छा-खासा धन खर्च कर रहे हैं। कुछ को अपेक्षित परिणाम भी मिलते हैं, लेकिन ज्यादातर गलत इलाज का खामियाजा भुगतने को मजबूर होते हैं।
नियामक संस्था नहीं
इसके लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट से जुड़ी किसी नियामक संस्था के न होने को दोषी ठहराया जा सकता है। यही नहीं, देश में कॉस्मेटिक क्लीनिक शुरू करने और उसकी कार्यप्रणाली पर निगाह रखने की भी कोई संस्था या नियम-कानून नहीं है। यही कारण है कि तमाम स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। मसलन स्पा मसाज के लिए होते हैं, लेकिन ज्यादातर स्किन और बॉडी ट्रीटमेंट भी देते हैं।
प्रोफेशनल्स की कमी
पार्लर्स या क्लीनिक में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी भी दुर्घटनाओं को जन्म देने का बड़ा कारण है। किसी भी तरह का सौंदर्य उपचार उस विद्या में दक्ष प्लास्टिक सर्जन द्वारा करना चाहिए। लेकिन अधिकांश मामलों में डर्मेटोलॉजिस्ट या शार्ट-टर्म कोर्स किए लोग ही इसे अंजाम दे रहे हैं।
साइड इफैक्ट्स
उपयुक्त प्रोफेशनल्स के न होने की वजह से ही लोगों को ट्रीटमेंट के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। उलटे उन्हें साइड इफैक्ट्स से अलग जूझना पड़ता है। कुछ ट्रीटमेंट के साथ तो खतरे की आशंका सर्वाधिक होती है, इसीलिए उन्हें प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में अंजाम दिया जाता है। मसलन लिपोसक्शन(चर्बी हटाना)। इसे करने वाले ज्यादातर डॉक्टर दक्ष नहीं है। राइनोप्लास्टी (नाक ठीक करना) के केस भी इसी कारण बिगड़ जाते हैं। हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़े ट्रीटमेंट के भी ज्यादातर मामलों में निराशा हाथ लगती है।
पैसों पर ध्यान
कॉस्मेटिक उपचार देने वालों में नीम-हकीमों की संख्या भी कम नहीं है। अक्सर लोग पैसों को तरजीह देते हैं और ट्रीटमेंट की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते। सबसे सुरक्षित तरीका तो यही है कि जिस डॉक्टर से ट्रीटमेंट ले रहे हैं, उसकी विश्वसनीयता परख लें। किसी ट्रीटमेंट को लेने के बाद जरूरी है कि समय-समय पर उसकी नियमित जांच कराई जाती रहे, लेकिन अधिकांश लोग इस साधारण नियम को नजरअंदाज कर देते हैं। जरूरी है कि यह जांच कर लें कि संबंधित डॉक्टर मेडिकल कॉउंसिल में पंजीकृत है या नहीं। जहां तक संभव हो किसी अच्छे और बड़े अस्पताल से जुड़े किसी कॉस्मेटिक सर्जन या डॉक्टर की ही सेवाएं लें। इस तरह आप साइड इफैक्ट से बच सकेंगे।
-डॉ. अनूप धीर
कॉस्मेटिक सर्जन, नई दिल्ली
इनका रखें ध्यान
एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक एंड प्लास्टिक र्सजस के मुताबिक किसी ब्यूटी ट्रीटमेंट या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से पहले निम्न सावधानी बरती जा सकती है।
> मेडिकल कॉउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त क्लीनिक की सेवाएं लें। डॉक्टर की डिग्री, अनुभव और रिकॉर्ड की भी जानकारी करें।
> अमूमन डॉक्टर अपनी डिग्रियां फ्रेम करा के रखते हैं। अगर ऐसा नहीं हो तो उनसे दिखाने को कहें।
> भले ही डॉक्टर कितना अनुभवी क्यों न हो, लेकिन जो ट्रीटमेंट आप लेने जा रहे हैं, उसमें उसकी दक्षता जानना कतई नहीं भूलें।
> आपात स्थिति के लिए इंतजाम क्लीनिक में हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी करें।
> डॉक्टर के दावों पर यकीन न करें। उनसे अमल में लाई जा रही तकनीक के संभावित परिणाम और शामिल खतरों के बाबत लिखित में लें।
> अस्पताल या क्लीनिक के पेपर पर साइन करने से पहले नियम-कायदों और जवाबदेही से जुड़ी सारी बातें ध्यान से पढ़ लें।
> संबंधित विशेषज्ञ या डॉक्टर से पहले इलाज करा चुके व्यक्ति से फीडबैक लें।
> साइड इफैक्ट और उससे कैसे निपटा जाएगा, इस पर डॉक्टर से पहले ही बात कर लें।
आज किसी भी शहर की गली-गली में स्पा और ब्यूटी पार्लर के बोर्ड देखे जा सकते हैं। ये सभी तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट का भी दावा करते हैं। त्वचा की कायाकल्प से लेकर लेजर विधि द्वारा अनचाहे बालों से छुटकारा दिलाने तक। सौंदर्य और आकर्षण में बढ़ोतरी करने वाले इन ट्रीटमेंट के फेर में लोग अच्छा-खासा धन खर्च कर रहे हैं। कुछ को अपेक्षित परिणाम भी मिलते हैं, लेकिन ज्यादातर गलत इलाज का खामियाजा भुगतने को मजबूर होते हैं।
नियामक संस्था नहीं
इसके लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट से जुड़ी किसी नियामक संस्था के न होने को दोषी ठहराया जा सकता है। यही नहीं, देश में कॉस्मेटिक क्लीनिक शुरू करने और उसकी कार्यप्रणाली पर निगाह रखने की भी कोई संस्था या नियम-कानून नहीं है। यही कारण है कि तमाम स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। मसलन स्पा मसाज के लिए होते हैं, लेकिन ज्यादातर स्किन और बॉडी ट्रीटमेंट भी देते हैं।
प्रोफेशनल्स की कमी
पार्लर्स या क्लीनिक में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी भी दुर्घटनाओं को जन्म देने का बड़ा कारण है। किसी भी तरह का सौंदर्य उपचार उस विद्या में दक्ष प्लास्टिक सर्जन द्वारा करना चाहिए। लेकिन अधिकांश मामलों में डर्मेटोलॉजिस्ट या शार्ट-टर्म कोर्स किए लोग ही इसे अंजाम दे रहे हैं।
साइड इफैक्ट्स
उपयुक्त प्रोफेशनल्स के न होने की वजह से ही लोगों को ट्रीटमेंट के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। उलटे उन्हें साइड इफैक्ट्स से अलग जूझना पड़ता है। कुछ ट्रीटमेंट के साथ तो खतरे की आशंका सर्वाधिक होती है, इसीलिए उन्हें प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में अंजाम दिया जाता है। मसलन लिपोसक्शन(चर्बी हटाना)। इसे करने वाले ज्यादातर डॉक्टर दक्ष नहीं है। राइनोप्लास्टी (नाक ठीक करना) के केस भी इसी कारण बिगड़ जाते हैं। हेयर ट्रांसप्लांट से जुड़े ट्रीटमेंट के भी ज्यादातर मामलों में निराशा हाथ लगती है।
पैसों पर ध्यान
कॉस्मेटिक उपचार देने वालों में नीम-हकीमों की संख्या भी कम नहीं है। अक्सर लोग पैसों को तरजीह देते हैं और ट्रीटमेंट की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते। सबसे सुरक्षित तरीका तो यही है कि जिस डॉक्टर से ट्रीटमेंट ले रहे हैं, उसकी विश्वसनीयता परख लें। किसी ट्रीटमेंट को लेने के बाद जरूरी है कि समय-समय पर उसकी नियमित जांच कराई जाती रहे, लेकिन अधिकांश लोग इस साधारण नियम को नजरअंदाज कर देते हैं। जरूरी है कि यह जांच कर लें कि संबंधित डॉक्टर मेडिकल कॉउंसिल में पंजीकृत है या नहीं। जहां तक संभव हो किसी अच्छे और बड़े अस्पताल से जुड़े किसी कॉस्मेटिक सर्जन या डॉक्टर की ही सेवाएं लें। इस तरह आप साइड इफैक्ट से बच सकेंगे।
-डॉ. अनूप धीर
कॉस्मेटिक सर्जन, नई दिल्ली
इनका रखें ध्यान
एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक एंड प्लास्टिक र्सजस के मुताबिक किसी ब्यूटी ट्रीटमेंट या टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से पहले निम्न सावधानी बरती जा सकती है।
> मेडिकल कॉउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त क्लीनिक की सेवाएं लें। डॉक्टर की डिग्री, अनुभव और रिकॉर्ड की भी जानकारी करें।
> अमूमन डॉक्टर अपनी डिग्रियां फ्रेम करा के रखते हैं। अगर ऐसा नहीं हो तो उनसे दिखाने को कहें।
> भले ही डॉक्टर कितना अनुभवी क्यों न हो, लेकिन जो ट्रीटमेंट आप लेने जा रहे हैं, उसमें उसकी दक्षता जानना कतई नहीं भूलें।
> आपात स्थिति के लिए इंतजाम क्लीनिक में हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी करें।
> डॉक्टर के दावों पर यकीन न करें। उनसे अमल में लाई जा रही तकनीक के संभावित परिणाम और शामिल खतरों के बाबत लिखित में लें।
> अस्पताल या क्लीनिक के पेपर पर साइन करने से पहले नियम-कायदों और जवाबदेही से जुड़ी सारी बातें ध्यान से पढ़ लें।
> संबंधित विशेषज्ञ या डॉक्टर से पहले इलाज करा चुके व्यक्ति से फीडबैक लें।
> साइड इफैक्ट और उससे कैसे निपटा जाएगा, इस पर डॉक्टर से पहले ही बात कर लें।

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